Friday, December 14, 2018

क्या जीएसटी से देश की एकता व अखण्डता की सुरक्षा होगी ?  

क्या जीएसटी  से देश की एकता व अखण्डता की सुरक्षा होगी ?

 

हर बात पर बोलने व हर काम का यश लेने के लिए देश के प्रधान मंत्री मोदी जी स्वयं आगे आ जाते है. नोट बंदी के समय भी रिज़र्व बैंक गवर्नर को पीछे धकेल कर नोट बंदी की घोषणा स्वयं पीएम मोदीजी ने की थी लेकिन उसका अनुभव अच्छा नहीं रहा था परिणाम स्वरुप फिर स्वयं पीछे खिसक लिए थे. लेकिन इस बार जीएसटी के मामले में पीएम मोदीजी ने अपने आप को पीछे रखा है तथा फारवर्ड खेलने के लिए देश के नवोदित  अर्थ-शास्त्री जेटली जी को खुला छोड़ा रखा है.

लेकिन हकीकत यह है कि  पीएम मोदीजी इस बार जीएसटी  का खेल मैदान के बाहर टीम मेनेजर या कोच  के रूप में  एक विज्ञापन के माध्यम से खेल रहे है.  आज-कल एक विज्ञापन चल रहा है जिसके अनुसार ‘जीएसटी’ देश की सेना, सीमा सुरक्षा व देश की एकता-अखण्डता  के लिए है, इसलिए इसे अपनाना है.

जब मनमोहनसिंह जी जीएसटी लेकर आये थे तब, तब के गुजरात के सीएम मोदी जीएसटी को देश की एकता व अखण्डता के खिलाफ बताते रहे  तथा कई आरोपों के साथ इसका बेहिसाब विरोध किया था तथा बीजेपी के विरोध के कारण ही ‘मनमोहनसिंह जीएसटी’ उस समय लागू नहीं हो सका लेकिन अब वही जीएसटी अब ‘मोदी जीएसटी’ के रूप में लागू होने जा रहा है क्योकि नकली सोने वाला  ‘मनमोहन सिंह जीएसटी’ पर मोदी जी के पारस हाथ लगते ही यह अब ‘मोदी जीएसटी’  के रूप में खरा सोना हो चुका है.

गरीब आदमी चना खाता है तो कहा जाता है कि भूख मिटाने के लिए चने खाकर पेट भर रहा है लेकिन एक कंजूस पेसे वाला चना खाता  है तो वह कहता है कि मैं तो शोक से प्रोटीन / गुणकारी चीज खा रहा हूँ. ठीक इसी तरह ‘गरीब मनमोहनसिंह’  द्वारा लाया गया जीएसटी तो देश की एकता व अखण्डता के खिलाफ था लेकिन ‘ताकतवर मोदीजी’  के पारस हाथ लगते ही वही जीएसटी देश की एकता व अखण्डता के लिए प्रोटीनयुक्त व गुणकारी हो गया है.

लेकिन समझ में नहीं आया : लेकिन समझ में यह नहीं आ रहा है कि जीएसटी से देश की एकता व अखण्डता की रक्षा केसे होगी (हालाकि जीएसटी क़ानून में जीएसटी का उद्देश्य देश की एकता व अखण्डता को नहीं बताया गया गया है)? नोट बंदी के समय में भी नोट बंदी को लिखित में देश की अखण्डता, पाकिस्तान, आतंकवाद, नक्सलवाद व  कालाधन को आगे किया गया लेकिन नोट बंदी से पाकिस्तान, आतंकवाद, नक्सलवाद व  कालाधन  को लेकर देश को क्या मिला, किसी को कुछ भी पता नहीं है और उस पर सब चुप है.

क्या जीएसटी का उद्देश्य राजनीतिक है : मैं दावा तो नहीं करता लेकिन मेरा विश्वास है कि जीएसटी का मुख्य व छिपा हुआ आधार राजनीतिक है. जीएसटी के बाद राज्य सरकारों पर नकेल कसना केंद्र सरकार के लिए काफी आसान हो जाएगा. पहले कांग्रेस यही चाहती थी और अब बीजेपी भी. जीएसटी लागू हो जाने बाद एक हद तक राज्य सरकारों की हालत नगरपालिकाओं  जेसी हो जायेगी क्योकि वैट क़ानून उनके अधिकार से बाहर हो जाएगा. निश्चिततोर पर जीएसटी से कांग्रेस का केंद्र तो मजबूत नहीं हो पाया लेकिन मोदी जी का  केंद्र अवश्य मजबूत होगा जिसकी झलक राष्ट्रपति चुनाव से दिखनी चालू हो जायेगी.

सीए के सी मूंदडा (कैलाश चंद्रा)

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