Sunday, February 24, 2019

जिस दिन पेट्रोल-डीजल पर सामान्य जीएसटी (GST) लग जाएगा, कई राज्य सरकारे (State Governments) दिवालिया हो जायेगी !  

जिस दिन पेट्रोल-डीजल पर सामान्य जीएसटी (GST) लग जाएगा, कई राज्य सरकारे (State Governments) दिवालिया हो जायेगी !

 

देश के कई मंत्री पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel)  की बढ़ती कीमतो के लिए राज्य सरकारो व वैट को जिम्मेदार बताकर जीएसटी से पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतो को नियंत्रण की बात करते है. कहा और प्रचारित यह जाता है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतो में भारी कमी हो जायेगी. ऐसे कहने वाले या दावा करने वाले या सुझाव देने वाले सब के सब झूठे है और देश की जनता को गुमराह कर रहे है बल्कि जिस दिन पेट्रोल-डीजल पर सामान्य जीएसटी (General GST) लग जाएगा, कई राज्य सरकारे (State Governments) दिवालिया ( Bankrupt) हो जायेगी. इसलिए अब पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना ही असंभव सा हो गया है.

क्या जीएसटी के बाद एक देश – एक टैक्स हो चुका है : नही. देश की सरकार ने ‘एक देश – एक टैक्स’ (One Nation – One Tax) मात्र एक नारा दिया था जिससे राष्ट्रीयता की भावना (Nationality) जागृत कर जीएसटी को एक अच्छा टैक्स (Good Tax) बताकर इसको विरोध से बचाने का प्रयास किया गया. कर (Tax) संबंधी कई क़ानून आज भी पहले की तरह पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से लागू है. जेसे पेट्रोल-डीजल पर वैट ( Vat on Petrol-Diesel)  आज भी लागू है यानिकी वैट समाप्त ही नहीं हुआ. राज्य सरकारों के राजस्व ( Revenue of State Governments)के कई कर (Tax) पहले की तरह ही जारी है.

राज्य सरकारे पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में क्यों नहीं लाना चाहती : जीएसटी से पूर्व ज्यादातर राज्यों का सबसे बड़ा राजस्व वैट (Revenue From VAT) से ही आता था तथा भारत के अधिकाँश राज्यों के राजस्व का मुख्य स्रोत्र ही वैट (VAT main source) ही था. वैट के अलावा शराब राजस्व (Alcohal Revene), माइनिंग राजस्व (Mining Revenue) व वाहन राजस्व (Vehicles Revenue) आदि कुछ प्रमुख स्रोत्र आज भी जारी है. मोटे तोर पर आमजन से जुड़ा पेट्रोल-डीजल जीएसटी से बाहर होने के कारण कई राज्य सरकारो का मुख्य राजस्व ही पेट्रोल-डीजल पर वैट / अन्य कर से आती है जिससे कई राज्य सरकारे पेट्रोल-डीजल पर मिलने वाले वैट (VAT) पर आश्रित है.

जीएसटी का मोटा हिस्सा केंद्र के मार्फ़त बंटता है जिससे लगभग हर राज्य सरकार केंद्र सरकार पर आश्रित हो चुकी है. इन हालातो में कोई राज्य सरकार (बीजेपी शासित राज्यों सहित – BJP Rules States) पेट्रोल-डीजल पर से अपना हक़ अब नहीं छोड़ना चाहेगी और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी (Petrol-Diesel under GST) के दायरे कभी भी लाना नहीं चाहेगी.

अब तो केंद्र सरकार भी पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में नहीं लाना चाहती : अब तक जीएसटी के हालात और परिणामो से केंद्र सरकार (Central Government) भी वाकिब हो चुकी है. यह कहना उचित होगा कि पेट्रोल-डीजल से ही केंद्र सरकार को बहुत बड़ा राजस्व मिलता है जिसे केंद्र सरकार भी खोना नहीं चाहेगी. जीएसटी में तो इनपुट (Input) की व्यवस्था है जिससे वर्त्तमान राजस्व को तगड़ा नुकसान होगा. परिणामत: केंद्र सरकार कहे भले ही कुछ भी, वह भी अपनी गाड़ी पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रख कर ही चलाना चाहती है.

क्या केंद्र सरकार  पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाकर पेट्रोल-डीजल को सस्ता कर सकती है ? : असली सच्चाई तो यह है कि पेट्रोल-डीजल की कीमते आज भी मुख्य तोर पर केंद्र सरकार के नियंत्रण में और आंशिक रूप से राज्य सरकारों के नियंत्रण में. सभी ने देखा कि गुजरात चुनाव के समय गुजरात में पेट्रोल-डीजल की कीमते राजस्थान से सस्ती हो गयी और चुनाव के बाद वापिस बढ़ा दी गयी. इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमतो के लिए वैट व जीएसटी तो बहाना / माध्यम मात्र है जिसका नियंत्रण सरकारे करती है. सरकारे (सरकारी नीति या नीयत – Govt. Policy and Intention) चाहे तो कीमते आज भी कम कर सकती है लेकिन ऐसा सिर्फ चुनावी नफे-नुकसान के लिए तात्कालिक रूप से हो सकता है, अन्यथा नहीं.

सारांश

  1. पेट्रोल-डीजल की कीमतो के लिए वैट व जीएसटी तो बहाना / माध्यम मात्र है जिसका नियंत्रण सरकारे (सरकारी नीति व नीयत)  करती है (Prices of Petrol-Diesel are controlled by Govt. Policy and Intention only).
  2. राज्य सरकारे अब पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अधीन नहीं जाने देगी (Petrol-Diesel will not be under GST).
  3. यदि पेट्रोल-डीजल पर सामान्य जीएसटी लग जाएगा, कई राज्य सरकारे दिवालिया हो जायेगी (Many State Governments will become Bankrupt if Petrol-Diesel will come under GST) .

सीए कैलाश चंद्रा (CA. K.C.Moondra)

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