Friday, December 14, 2018

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नहीं देगी स्तीफा लेकिन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को जाना पडेगा !  

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नहीं देगी स्तीफा लेकिन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को जाना पडेगा !

राजस्थान में हुए 2 लोकसभा व एक विधान-सभा क्षेत्रो के उपचुनावों में इन क्षेत्रो से जुड़े सभी  17 विधान सभा क्षेत्रो में भाजपा की बुरी हार के साथ ही मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे के इस्तीफे की चर्चा जोर पकड़ने लग गयी. यही नहीं नए संभावित मुख्य-मंत्री के उम्मीदवारों के नाम भी हवा में आ चुके है.

अंदरूनी हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि स्वयं प्रधान मंत्री मोदी भी वसुंधरा राजे का इस्तीफा चाहते है लेकिन इसकी संभावना दूर-दूर तक नहीं है.  जो भी लोग वसुंधरा राजे की नब्ज को जानते है, उसके अनुसार वसुंधरा राजे किसी भी कीमत पर इस्तीफा नहीं देगी. वह अधिक से अधिक अपने प्रदेश अध्यक्ष व कुछ मंत्रियो की बलि स्वीकार कर सकती है, इससे ज्यादा कुछ नहीं.

भाजपा की राजनीति के जानकारों के अनुसार यह तीसरा मोका है जब वसुंधरा राजे से इस्तीफे की उम्मीद की जा रही है लेकिन वसुंधरा राजे भाजपा की एक मात्र क्षेत्रीय क्षत्रप है जिसने मोदी-शाह की जोड़ी के सामने अभी तक भी घुटने नहीं टेके है और लगभग ‘राजस्थान भाजपा’ पर वसुंधरा राजे का वर्चस्व कायम रखा है. राजस्थान भाजपा में स्पष्ट रूप से दो मुख्य खेमे है, एक वसुंधरा समर्थक व दूसरा वसुंधरा विरोधी (मोदी समर्थक). आगामी चुनावों में 125 वर्तमान एल.एल.ए. के टिकट काटने की बात को हवा देकर वसुधरा खेमा और मजबूत हो गया है.

क्या कहता और क्या चाहता वसुंधरा विरोधी (मोदी समर्थक) खेमा ? :   यह खेमा इस बुरी हार का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ वसुंधरा राजे को मानते है और  मोदी-शाह की जोड़ी के सामने घुटने नहीं टेकने के कारण भी यही मोका है जब उसको मोदी-शाह की जोड़ी के सामने झुकाया जा सकता है.

क्या कहता और क्या चाहता वसुंधरा समर्थक खेमा ? :   यह खेमा इस बुरी हार का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ भाजपा की मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों को मानती है. इस खेमा का यह भी कहना है कि पंजाब, अमृतसर, गोवा, गुजरात व उत्तरप्रदेश नगरीय निकायों के चुनावों आदि मे हुई पतली हालत या हार के लिए किसी ने भी इस्तीफा नहीं दिया, तो वसुंधरा राजे क्यों इस्तीफा देगी.

इस खेमा का यह भी आरोप है कि वसुंधरा विरोधी (मोदी समर्थक) खेमा ने जानबूझ कर वसुंधरा राजे को नीचा दिखाने के लिए इन चुनावों में पार्री उम्मीदवारों को हारने के लिए काम किया जबकि दूसरी और वसुंधरा ने पूर्व में उद्घाटित रिफाइनरी का मोदी जी से उदघाटन करवा कर पार्टी के पक्ष में माहोल बनाने का काम किया. इस खेमे का यह भी मानना है पूरे देश में मोदी विरोधी जोरो पर है, जिसके लिए वसुंधरा राजे केसे जिम्मेदार हो सकती है. 

चर्चा का अंत कहा होगा : वसुब्धरा राज कायम होगा और जनता कि दिखाने के किये प्रदेश अध्यक्ष परनामी व कुछ मंत्रियो को हटाया जाएगा. 2018 का राजस्थान विधानसभा का चुनाव प्रधान मंत्री मोदी के नतृत्व में लड़ा जाएगा और टिकट वितरण में वसुंधरा के पर काट दिए जायेंगे. संभावना बहुत कम है फिर भी यदि भाजपा जोड़-तोड़ कर सरकार बनाती है तो वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री वापिस नहीं बन पायेगी. भाजपा हारे या जीते वसुंधरा राजे प्रदेश की अगली मुख्यमंत्री नहीं होगी.

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