Friday, September 6, 2019

आधुनिक विज्ञान से विकास हो रहा हैं याँ विनाश। भारतीय पुरातन ज्ञान (भाग-49)-  

रामायण की बातें त्रेता युग की हैं, कई लोग इसे सही नहीं मानते हों अथवा इन्हें काल्पनिक मानते हों तो द्वापर युग की बात करते हैं, जिसमें महाभारत का युद्ध हुआ था। इस युद्ध के बाद ही द्वापर युग समाप्त होकर वर्तमान कलयुग का प्रारम्भ हुआ। द्वापर युग की बात करें, तो कई अविश्वसनीय तथ्य पढ़ने को मिलते हैं। काफी तथ्य तो आधुनिक विज्ञान द्वारा की गई खोजो से आज सही प्रतीत होने लगे हैं, जिसे देखते हुए अन्य बातों के भी सही होने की अब सम्भावना लगने लगी हैं। जैसे-
♦ अंधे धृतराष्ट्र को महल में संजय द्वारा युद्ध क्षेत्र का आँखों देखा हाल सुनाना। जब तक विज्ञान द्वारा टी0 वी0 की खोज नहीं हुई थी, तब तक इस बात को समझ पाना हमारे लिए असम्भव था।
♦ महारानी गांधारी का अचानक गर्भपात हो गया। गर्भ कई टुकड़ों में बिखर गया। तुरन्त राजगुरु को बुलाया गया। उन्होंने तुरन्त कुछ आवश्यक सामग्री मंगाई, और जितने टुकड़े थे, उतने मिट्टी के घड़े मंगाकर उस सामग्री को सभी घड़ों में डलवाकर, उनमें गर्भ के टुकड़ों को रखकर संरक्षित करवा दिया। एक गर्भ के हुए सौ टुकड़ों को संरक्षित कर, सभी को जीवन दे दिया गया। सौ कौरवों के जन्म की यही कहानी हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, परन्तु आधुनिक विज्ञान द्वारा टेस्ट ट्यूब बेबी का अविष्कार करने के बाद, इस घटना पर भी विश्वास होने लगा हैं।
♦ आज कल हम शक्ति का माप अश्व शक्ति यानि हॉर्सपॉवर के रूप में करते हैं, जबकि पहले यह माप गजशक्ति के रूप में होता था। पांडव पुत्र भीम में दस हजार हाथियों का बल बताया गया था। उल्लेख हैं क़ि भीम ने अपने बाहुबल से हाथियों को उठाकर आकाश में उछाल दिया, जिसमें कई तो नीचे गिरकर मर गए, और कई आज तक वापस नहीं आये। इस बात पर भरोसा तब बना, जब आधुनिक विज्ञान ने यह बताया कि, कोई भी वस्तु पृथ्वी के गुरुत्त्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकल जाने पर वापस धरा पर नहीं लौटती हैं, बल्कि अनन्त ब्रह्माण्ड में खो जाती हैं।
♦ पांडवों द्वारा अपने लिए नया महल बनवाया गया था, जिसे देखने दुर्योधन भी गया था। उसे एक जगह पानी सा प्रतीत हुआ, जबकि वहाँ चमकता हुआ फर्श ही था। इसी से प्रभावित, वह एक जगह पानी को फर्श समझकर पानी में गिर गया। आज के युग में भी ऐसे निर्माण होने लगे हैं, जिससे द्वापर युग की अनुपम वास्तु कला पर भी अब विश्वास होने लगा हैं।
अगर आज के विज्ञान द्वारा टी0 वी0, टेस्ट ट्यूब बेबी व आधुनिक निर्माण कला जैसी तकनीके ईजाद नहीं की जाती, तो इन पौराणिक बातों पर हम आज भी संशय की स्थिति में ही रहते।
इन सब के आलावा अभी कई आश्चर्यजनक बातें समझनी बाक़ी हैं, जो उस समय के अद्भुत ज्ञान/विज्ञान को दर्शाता हैं-
♦ भीष्म पितामह के पास इच्छा मृत्यु की शक्ति थी। यही कारण था कि उनका पूरा शरीर बाणों से छलनी हो जाने के बाद भी वो युद्ध समाप्त न होने तक जीवित रहे।
♦ महाभारत युद्ध के समय भीष्म पितामह की उम्र लगभग सात सौ वर्ष की थी। गुरु द्रोणाचार्य की उम्र तीन सौ वर्ष थी। क्या फिर भी आप मानते हैं कि आज के विज्ञान से हमारी औसत आयु में वृद्धि हुई हैं।
♦आदमी की हिम्मत व क्षमता का अंदाज तो इस बात से ही लगाया जा सकता हैं कि धर्म की रक्षार्थ, दुष्ट मानव शक्तियों का नाश करने हेतु स्वयं भगवान को, श्री कृष्ण के रूप में अवतरित होना पड़ा।
♦राजा पाण्डु श्रापित हो जाने से सन्तान प्राप्ति में अक्षम हो गये थे। उनकी पत्नि कुंती के पास ऐसी मन्त्र शक्ति थी, जिससे वह किसी भी देवता का आह्वान कर उसे अपने पास बुला सकती थी। अपने पति की आज्ञा से उसने देवताओं का आह्वान करके ही सारी सन्ताने प्राप्त की थी। कर्ण भी कुंती का ही पुत्र था जिसे उसने नादानीवश अपने कुंवारेपन में ही सूर्य का आह्वान कर प्राप्त कर लिया था। क्या यह सब हमारे लिए आज सम्भव हैं? क्या हम आज किसी देवता को अपने पास आने के लिये विवश कर सकते हैं? अथवा यह सब बातें कोरी काल्पनिक हैं?
♦ महाभारत के युद्ध में पूरा विश्व दो हिस्सों में बंटकर सम्मिलित हुआ। यह युद्ध सम्पूर्ण सभ्यता के विनाश का कारण बना। इस युद्ध में ऐसे विनाशकारी हथियार प्रयोग में लाये गए थे कि पूरी पृथ्वी का वातावरण दूषित हो गया था। उसी के परिणाम स्वरूप कलयुग का प्रादुर्भाव हुआ। पर फिर भी उस समय के विज्ञान के पास हर घातक हथियार का तोड़ उपलब्ध था। छोड़े गए हथियार को रोकने की क्षमता थी। हर घातक हथियार को निष्प्रभावी करने की क्षमता थी। इंसान के पास अद्भुत शौर्य क्षमता थी। मृत्यु से कोई भयभीत नहीं था। युद्ध में राजा आगे रहता था। क्या आज यह सब सम्भव हैं?
शेष अगली कड़ी में—-         
                                                                                             लेखक : शिव रतन मुंदड़ा

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