Wednesday, December 18, 2019

एक मामला, एक ही वर्ष और एक अधिकारी लेकिन फेसले दो – केसे हुआ?  

एक मामला, एक ही वर्ष और एक अधिकारी लेकिन फेसले दो – केसे हुआ? आयकर अत्याचार और भ्रष्टाचार की सच्ची कहानिया – 6

(इस विषय का विडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करे)

1. यह कहानी वाकई रोचक होने के साथ साथ भ्रष्टाचार और अत्याचार की जीती जागती मिसाल है.
2. कहानी है एक सहायक आयकर आयुक्त, पाली (राजस्थान) की जो कि एल.एल.एम होने के कारण अपने आपको क़ानून का ज्ञाता समझता था.
3. कहानी है सुमेरपुर (राजस्थान) के नरेन्द्र सिंह चोधरी की.
4. एक गंभीर और उलझे हुए मामले में, भूल सुधार हेतु आयकर अधिनियम की धारा 154 के तहत पिता और पुत्र के दो आवेदन पर आदेश का मामला था. एक सुमेरपुर में और दूसरा पाली में.

5. मै स्वयं केस में करदाता का प्रतिनिधित्व कर रहा था, दोनों आयकर कार्यालय में.
6. मूल मामला अपील में लंबित था जोधपुर में.
7. आज का भाषण कुछ नए अंदाज में.
8. करदाता नरेन्द्र सिंह चोधरी का उस समय के एक शपथ-पत्र की फोटो कॉपी उपलब्ध है जिसको ही पढ़कर आपको सुनाने जा रहा हूँ. यह शपथ-पत्र आयकर विभाग की जांच के दौरान दिया गया था.

9. यह शपथ-पत्र अपने आप में भ्रष्टाचार की पूरी कहानी बयान कर रहा है और इसके नक़ल भी इसी विडियो के अंतिम भाग में पढ़ने को मिलेगी. कुछ समय बाद आप इसे newsclub.co.in पर भी पढ़ सकेंगे और डाउनलोड कर सकेंगे.
10. तो सुनिए नरेन्द्र सिंह जी ने क्या लिखा इस भ्रष्टाचार की कहानी को लेकर.
11. ……………………………….शपथ पत्र से …………………………

12. अब करदाता के पास हो गए दो आदेश ? दोनों ही आदेशो को इसी विडियो के अंतिम भाग में आप देख सकेंगे.
13. करदाता ने पुन: इन दो आदेशो की भूल सुधार के लिए आवेदन किया लेकिन पूर्ण रूप से संतुष्ट हो जाने के बावजूद, अपने सीनियर पूर्व अधिकारी के आदेश में छेड़छाड़ करने से मना कर दिया और आवेदन खारिज कर दिया.
14. अब चला शिकायतों को दौर.
15. जबरदस्त प्रबंध और कानूनी दावपेच के चलते के कारण अधिकारी का कुछ नहीं बिगड़ा और करदाता की शिकायत रद्दी की टोकरी में फिकवाते रहे.

16. इन शिकायतों के चलते प्रमोशन भी अटका रहा लेकिन जोधपुर स्थित विभागीय समर्थन के चलते कैट ने प्रमोशन आदेश दे दिया.
17. इस दरम्यान, करदाता अपनी मूल अपील हाई कोर्ट से जीत चुका था, अत: करदाता थककर शांत हो गया.
18. लेकिन प्रमोशन में देरी होते देख, अफसर ने आयकर विभाग के मुखिया के खिलाफ अवमानना का मुकदमा दायर कर दिया जिससे डर कर विभाग ने तत्काल प्रमोशन देकर उसे जॉइंट कमिश्नर बना दिया लेकिन विभाग की तौहीन से विभाग नाराज हो गया और अब करदाता की शिकायत को पुन: खोला गया.

19. पूरी विभागीय जांच हुई और इस Joint कमीशनर को suspend तो नहीं किया लेकिन उसके सारे रिटायरमेंट के पेसे, पेंशन आदि सब कुछ रोक दी गयी जो कि पिछले 15-20 सालो से अटकी पडी है और शायद जिन्दगी भर नहीं मिलेगी लेकिन विभाग में की गयी कमाई के सामने यह 30-40 लाख की रकम ज्यादा बड़ी नहीं है.20. इस मुश्किल लड़ाई में करदाता नरेन्द्र सिंह चौधरी की हिम्मत व धेर्य की दाद देता हूँ.
21. इस मामले में एक चीज साफ़ है कि अफसर कितना भी गलत क्यों नहीं हो, प्रजातांत्रिक भारत में करदाता का ही बड़ा नुकसान होता है.
22. यह अलग बात है की 12 साल की लड़ाई के बाद, हाई कोर्ट से करदाता आराम से जीत गया लेकिन उसके नुकसान के लिए किसी भी अफसर को कोई दंड नहीं मिला.
23. यह थी पूरी कहानी एक हिम्मती करदाता की, जो कि करदाताओ के लिए बड़ी प्रेरणादायक है.

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