Tuesday, January 14, 2020

आदर्श जेसी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज के एजेंट्स को लेना होगा अनिवार्य जीएसटी रजिस्ट्रेशन – एजेंट्स से जीएसटी की कटोती गेर-कानूनी ?  

आदर्श जेसी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज के एजेंट्स को लेना होगा अनिवार्य जीएसटी रजिस्ट्रेशन –  एजेंट्स से  जीएसटी की कटोती गेर-कानूनी ?

 

इससे पूर्व भी एक लेख “ एल.आई.सी. एजेंट्स ( LIC Agents) सहित सभी तरह के एजेंट्स, ब्रोकर्स व दलालों को करवाना होगा जीएसटी में रजिस्ट्रेशन ?“ न्यूज़ क्लब पर प्रकाशित हो चुका है जिसमे बताया गया था आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (Adarsh Credit Co-operative Society Limited) जेसी सभी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटियो (Credit Co-operative Societies के एजेंट्स (Agents)  के लिए भी देश की “एकता और अखण्डता” की प्रतीक  जीएसटी  क़ानून के तहत रजिस्ट्रेशन लेना अनिवार्य (Compulsory GST Registration) कर दिया गया.

सिर्फ रजिस्ट्रेशन ही नहीं बल्कि क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटियो के एजेंट्स को एक साल के सभी 37 जीएसटी  रिटर्न्स भी भरने होंगे और हर महीने के कमीशन के लिए बिल जारी करना होगा तथा सोसाइटी  से जीएसटी  टैक्स 18% की दर से वसूल कर हर महीने सरकारी खजाने में जमा कराना होगा. 20.00 लाख से कम कमीशन होने बावजूद ऐसे एजेंट्स को कम्पोजीशन स्कीम (GST Composition) का भी कोई लाभ नहीं मिलेगा. मात्र 1000 – 2000 रू. कमीशन कमाने वाले एजेंट्स को भी रजिस्ट्रेशन लेना होगा.

ऐसा ही प्रावधान बीमा एजेंट्स व बैंक व कुछ वितीय संस्थानों के रिकवरी एजेंट्स के लिए भी बनाया गया था लेकिन उन्हें रजिस्ट्रेशन की छूट दे दी गयी तथा टैक्स जमा कराने के लिए बीमा कंपनियों व बैंको को RCM तहत स्वयं द्वारा  ही टैक्स जमा कराने की व्यवस्था दे दी गयी थी लेकिन ऐसी व्यवस्था या छूट  क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटियो के एजेंट्स को अभी तक तो नहीं दी गयी है. रजिस्ट्रेशन नहीं लेने वाले एजेंट्स को पेनल्टी व ब्याज का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

इन क़ानूनन  परिस्थितियों में  आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी जेसी सभी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटियो के एजेंट्स के लिए एक गंभीर नई समस्या खड़ी हो गयी है. छोटे-छोटे एजेंट्स के लिए जीएसटी  में रजिस्ट्रेशन लेना, 12 माह में 37 रिटर्न भरना, बड़ा ही मुश्किल व खर्चीला काम है. हमें मिली जानकारी के अनुसार ऐसे एजेंट्स ने अभी तक अपने आप को पंजीयन ही  नहीं कराये है. ऐसे ऐसे निरर्थक प्रावधान साबित करते है कि  जीएसटी क़ानून कितना अव्यवहारिक भी है.

एजेंट्स  से जीएसटी  की कटोती गेर-कानूनी : पिछले कुछ दिनों से एक अफवाह या जन-चर्चा चल रही है कि देश की सबसे बड़ी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी “आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड” अपने एजेंट्स के कमीशन में से जीएसटी की 18% रेट से कटोती काट रही है.  यदि यह बात सत्य है तो ऐसी कटोती गेर-कानूनी होने के साथ गंभीर दंडनीय अपराध है. ऐसी गलत व गेर-कानूनी कटोती के बावजूद भी एजेंट्स को किसी भी भी तरह की छोट या क्रेडिट नमी मिलेगी बल्कि वो डिफाल्टर ही रहेंगे.

कानूनन रूप से ऐसी किसी भी सोसाइटी को एजेंट्स की कोई आवश्यकता ही नहीं होती है क्योकि सोसाइटिया सिर्फ अपने सदस्यों से ही डिपॉजिट्स स्वीकार करती है, अत: उस स्थिति में एजेंट्स की आवश्यकता ही क्या है. लेकिन प्रशासनिक पोल व शिथिलता के चलते खुल्ले आम सदस्यों के साथ एजेंट्स के मार्फ़त व्यवहार किया जाता है जिस पर कमीशन दिया जाता है जो कि कुछ आयकर प्रावधानों का भी उलंघन्न है.

 

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