Sunday, December 24, 2017

किन-किन ग्रुप्स को क्यों मिला जीएसटी से छुटकारा ?  

किन-किन  ग्रुप्स को क्यों मिला जीएसटी से छुटकारा ?

A Powerful Pressure Group

भारत में कई कहावते व डायलॉग प्रचलित है, इन में से कुछ कहावते व डायलॉग की तरफ सभी पाठको का ध्यान खीचना जरूरी है जेसे – “ कमजोर को हर कोई दिखाता है आँख “,  “ ताकत के आगे बाहुबली सरकारे भी झुकती है “, “ सक्षम का नहीं दोष गुसाई “ व “ चमत्कार को नमस्कार “ आदि आदि . ये सभी कहावते व डायलॉग का भावार्थ जीएसटी – GST  में सरकार की नीति में स्पष्ट  दिख रहे है.

जीएसटी  भी निश्चित तोर पर एक अप्रत्यक्ष कर है जो कि विक्रेता व सेवा प्रदाता द्वारा खरीददार (उपभोक्ता) से वसूल कर सरकारी राजस्व में जमा कराता है. पिछले कुछ वर्षो से एक नई परम्परा चली है कि यदि विक्रेता (Seller) व सेवा प्रदाता (Service Provider) कोई संगठित पावरफुल  ग्रुप (Organised powerful group) से सम्बन्ध रखता हो तो टैक्स की वसूली सीधे खरीददार / क्रेता से की जाने लगी है. ठीक इसी तरह ऐसे कई पावरफुल ग्रुप्स प्रजातांत्रिक सोसाइटी (Democratic Society) में सरकार की नजर में बन चुके है जिन्हें या तो सरकार नाराज नहीं करना चाहती या सरकार उनसे सामना ही नहीं कर सकती है.

ऐसे पावरफुल प्रेशर ग्रुप( Powerful Pressure Group) से सरकार टैक्स वसूलने को टाल देती है.  या तो बिलकुल ही नहीं वसूलती या फिर वसूली और किसी ओर के सिर पर डाल दी जाती है. इस तरह से ऐसे पावरफुल ग्रुप्स को छुट दे दी जाती है तथा जीएसटी में ऐसे कई प्रेशर पॉवरफुल ग्रुप्स है जिनको छूट दी गयी है, जिनकी चर्चा हम आगे कर रहे है – 

गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी – Goods Transport Agency – GTA : जब  सर्विस टैक्स (Service Tax) भारत में पहली बार लागू किया गया था तब गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी पर भी सर्विस टैक्स लाया गया था जिसका भारी विरोध सड़को पर हुआ. ऐसा ही असंगठित आन्दोलन अभी नोटबंदी (Demonetization) के समय भी tolls पर तोड़फोड़ के रूप में देखा गया था,  परिणाम स्वरुप टोल टैक्स (Toll Tax) की कई दिनों  तक वसूली रोक दी गयी थी. आज की तारीख में भारत में ट्रक ऑपरेटर ( Truck Operator ) सबसे भारी पावरफुल प्रेशर ग्रुप है जिसका सामना आज तक कोई सरकार नहीं कर पायी. इसी कारण ट्रक ऑपरेटर की सेवा / गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी  की सेवा पर जीएसटी  लगाया तो गया लेकिन उसको देश के सबसे कमजोर व बिखरे ग्रुप यानी कि व्यापारी (Businessmen) के सिर डाल दिया  गया और ट्रक ऑपरेटर / गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी को जीएसटी से आजाद रखा.

वकील – अधिवक्ता – Advocates : जब  सर्विस टैक्स लागू किया गया था, तब वकील – अधिवक्ता ( Advocates ) पर भी सर्विस टैक्स लाया गया था जिसका भारी विरोध हुआ और देश के कोर्ट (नीचे से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक) कई दिनों वकीलों की हड़ताल (Advocates Strike) के कारण बंद रहे थे और सारी न्यायिक व्यवस्था ठप्प कर दी गयी थी. उस समय वकील–अधिवक्ता के सामने सरकार को झुकना पडा था तथा मोटे तोर पर वकील – अधिवक्ता को सर्विस-टैक्स से आजाद कर दिया था. वकीलों के आन्दोलन आये दिन देखे जाते है जो साधारण तया सफल होते है . इसी वकील–अधिवक्ता की सेवा पर भी  जीएसटी  लगाया तो गया लेकिन उसको आंशिक रूप से फ्री कर दिया गया तथा शेष जीएसटी को, सेवा लेने वाला यदि व्यापारी है तो देश के इस सबसे कमजोर व बिखरे ग्रुप यानीकि व्यापारी के सिर पर डाल दिया  गया और हर हाल में वकील – अधिवक्ता को जीएसटी से आजाद रखा. सभी पाठको को ध्यान रहे कि वकील – अधिवक्ता का ग्रुप भी देश का सबसे संगठित  व बहुत ही पावरफुल ग्रुप है.

बीमा  एजेंट्स – Insurance Agents : बीमा  सेक्टर ( Insurance Sector ) पर मोटे तोर पर सरकारी कंपनियों (Govt. Companies) का कब्जा है. एक तरफ बीमा कंपनियों  से भारत सरकार को बहुत बड़ा fund मिलता है, तो दूसरी तरफ बीमा एजेंट ग्रुप ( Insuance Agent Group ) एक पूर्ण संगठित ग्रुप है जिसकी नाराजगी भी  भारत सरकार को महंगी पड़ सकती है. इसी बीमा एजेंट्स की सेवा पर भी जीएसटी  लगाया तो गया लेकिन उसको  बीमा कंपनियों के सिर पर डाल दिया  गया और हर हाल में बीमा एजेंट्स को जीएसटी से आजाद रखा. हालाकि लगता है, भूल से  इनका रजिस्ट्रेशन जीएसटी में अनिवार्य कर दिया, जिसकी पूरी  जानकारी अभी तक इस पावरफुल प्रेशर ग्रुप नहीं दिखती है. आप देखेंगे कि आने वाले समय में बीमा एजेंट को जीएसटी  रजिस्ट्रेशन ( GST Registration ) से भी मुक्त कर दिया जाएगा.

किसान – कृषि उत्पादक – Farmers : किसान – कृषि उत्पादक ग्रुप देश का असंगठित लेकिन सबसे पॉवर फुल प्रेशर ग्रुप है जिसके पास सबसे बड़ा वोट बैंक ( Vote Bank ) है, अत: इसे न केवल जीएसटी से आजाद रखा है बल्कि इस ग्रुप को हर किसी टैक्स से आजादी दी गयी है. साधारणतया किसान – कृषि उत्पादक को व्यापार की श्रेणी से बाहर ही रखा जाता है जिससे उस पर  कोई टैक्स लगता ही नहीं. लेकिन इस बार सरकार ने काजू, बीडी के पत्ते (तेंदू पत्ता) व तम्बाकू के पत्तो पर  जीएसटी तो लगाया लेकिन इसे भी व्यापारियों के  सिर पर डाल दिया  गया तथा और हर हाल में काजू, बीडी के पत्ते (तेंदू पत्ता) व तम्बाकू पत्तो के उत्पादक-किसानो को जीएसटी से आजाद रखा. ऐसे प्रेशर ग्रुप्स को खुश करने में सरकार को यह भी भूल जाती है कि बीडी के पत्ते (तेंदू पत्ता) की कोई खेती नहीं होती है बल्कि यह एक वन-उत्पाद है जो कि पूर्णत: सरकार के नियंत्रण में है.

सारांश : “ सरकारे भी झुकती है, झुकाने वाला होना चाहिए “.  “ ताकतवर से हर कोई ही नहीं,  सरकार भी डरती है “ लेकिन “ कमजोर को हर कोई आँख दिखाता हैइसी कारण देश के सबसे कमजोर व बिखरे ग्रुप यानी कि व्यापारी ग्रुप के सिर पर ही सारे कर / tax की जिम्मेदारी डाली जाती है / डाली गयी है.

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