Monday, September 30, 2019

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन द्वारा दी नयी व्यवस्था  

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन द्वारा दी नयी व्यवस्था

Mahakaleshwar-Mandir-2
महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित, महाकालेश्वर भगवान शिव का प्रमुख मंदिर है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है। इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है, ऐसी मान्यता है। महाकवि कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी की चर्चा करते हुए इस मंदिर की प्रशंसा की है।

मंदिर प्रबंध्न ने सभी भक्तों के लिए नयी व्यवस्था की है –

(१) भक्तों को निशुल्क मिलेगी महाकाल की भस्मी :  उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में सभी भक्तों को निशुल्क भस्मी मिलने लगी है। मंदिर के तिलक प्रसाद काउंटर से दर्शनार्थियों को भस्मी का वितरण किया जा रहा है। बाबा महाकाल की दिव्य भस्मी पाकर आस्था मुस्कुरा रही है। अभी तक ड्रायफ्रूट प्रसाद खरीदने पर ही भक्तों को भस्म मिलती थी।

मंदिर प्रशासक सुजानसिंह रावत ने भक्तों की भावना को देखते हुए पहली बार तिलक प्रसाद काउंटर से भस्मी वितरण शुरू करने का निर्णय लिया। काउंटरकर्मी भक्तों को पहले तिलक लगाते हैं। इसके बाद चिरोंजी के साथ एक चुटकी भस्म देते हैं। दूरदराज से आने वाले भक्त जय महाकाल का जयकारा लगाते हुए भस्मी ले रहे हैं। तिलक प्रसाद काउंटर से भस्मी वितरण के अलावा मंदिर प्रशासन ने लड्डू प्रसाद के साथ भी भस्मी देने की व्यवस्था शुरू कर दी है।

(२) ई पेपर के जरिए जान सकेंगे महाकाल मंदिर की गतिविधि : देश-विदेश में रहने वाले भक्त अब ई-पेपर के जरिए महाकाल मंदिर में होने वाली सभी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। मंदिर प्रबंध् समिति आठ पेज का ऑनलाइन न्यूज बुलेटिन निकालने की तैयारी कर रही है। मंदिर के जनसंपर्क विभाग को इसका जिम्मा सौंपा गया है।

ई-पेपर में मंदिर में होने वाले उत्सव, नित्य आने वाला दान, विभिन्न् प्रकल्पों की जानकारी तथा इनमें दान किस प्रकार दिया जा सकता है  तथा  अन्य जानकारियो  के साथ ओंकारेश्वर, नागचंद्रेश्वर सहित मंदिर परिसर में स्थित मंदिरों का महत्व, नागपंचमी, महाशिवरात्रि, श्रावण मास आदि पर विद्वानों के लेख आदि का समावेश किया जाएगा। ई-पेपर में दान दाताओं के फोटो सहित समाचार, दान में आई वस्तुओं के उपयोग की जानकारी आदि का समावेश किए जाने से मंदिर समिति को फायदा होगा। अफसरों का मानना है कि इससे लोग प्रेरित होंगे और मंदिर के विभिन्न् प्रकल्पों के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा आदि के लिए बढ़-चढ़कर दान करेंगे।

ई-पेपर को साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक निकाला जाए, इसको लेकर मंथन किया जा रहा है। अफसरों की मंशा है कि पहले इसे आठ पेज में तैयार किया जाए। इसके बाद न्यूज संख्या को देखते हुए इसके पृष्ठ तथा ऑनलाइन रीडरशिप को देख कर अवधि तय की जाएगी।

  • सोहिल दम्मानी, इंदौर

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