Friday, September 6, 2019

अब मोदी भक्तो के साथ विश्वासघात – मोदी सरकार की विश्वसनीयता भी खतरे में  

अब मोदी भक्तो के साथ विश्वासघात – मोदी सरकार की  विश्वसनियता भी खतरे में 

अब तो  मोदी नोटबंदी के अंतिम पड़ाव में मोदी भक्तो के साथ ही विश्वासघात हो गया जिससे समय के साथ मोदी सरकार व मोदी नोटबंदी, दोनों की विश्वसनीयता पूरी तरह से खतरे में पड़ चुकी है.

प्रश्न शुरू होता है 08.11.2016 की रिज़र्व बैंक की विज्ञप्ति से, और समाप्त होता है प्रधान मंत्री, वित्त-मंत्री, रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के कई मंत्रियो व सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्र अध्यक्ष के वादों, स्पष्टीकरण व जारी सरकारी आदेशो से, जहा बार बार लिखित में वादा किया गया व जुबान दी गयी कि 30.12.2016 तक आराम से 500 व 1000 के नोट सभी बैंको में जमा हो सकेंगे.

सरकार के मंत्रियो व खास तोर से वित-मंत्री व प्रधान मंत्री ने बार बार कहा कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, आतंकवाद व भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए  जनता का सहयोग माँगा व संयम बरतने व भीड़ / लाइन  से बचने के लिए बार बार आग्रह किया. मुझ जेसे मोदी भक्तो ने देश को भ्रष्टाचार व आतंकवाद  से मुक्त करने के लिए, सरकारी वादों व क़ानून पर विश्वास करके कल तक किसी भी बैंक का मुह नहीं देखा और कोई जल्दबाजी नहीं की, लाइन नहीं बढाई , भीड़ नहीं बढाई और सरकार को व मोदी जी का पूरा सहयोग किया.

अब जब घपले करने वाले घपले कर चुके व सारा पुराने नोटों का काला धन, नए नोटों के काले धन में बदल चुका है तथा सरकार के हर रोज के नए-नए बदलते नियम भी फेल हो गये तो मोदी जी ने अब नंबर लिया उन मोदी भक्तो का जिन्होंने मोदी जी की जुबान व सरकारी घोषणा का विश्वास करके संयम बरता जिन्होंने न तो बैंक में एक रूपया जमा कराया और न ही एक रूपया भी बैंक से नया नोट  निकाला. अब ऐसे मोदी भक्तो की 5000 से ज्यादा निकासी पर बैंक की दो अफसरों के सामने पेशी / पूछताछ होगी, उनको संतुष्ट करना होगा और वो संतुष्ट होंगे तो रूपया देंगे, नहीं तो नहीं देंगे.

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट होने ने नाते, मुझे तो इस शर्त का कोई जायज उद्देश्य नजर ही नहीं आता सिवाय इसके की सरकार नहीं चाहती है कि ओर नोट जमा हो.  क्या सराकार यह मेसेज देना चाहती है कि  अब आयकर अधिकारियों का काम बैंक अधिकारी करेंगे या  पहले जमा कराने वालो की जांच संभव नहीं है इसलिए अब जमा कराने वालो की जांच बैंक अधिकारी ही कर लेंगे. हकीकत तो यह है कि यह शर्त ही बेतुकी  व बेईमानीपूर्ण है अन्यथा बैंक में जमा कराने के बाद ही तो जमा कराने वाला सरकार  के टैक्स जाल में फंसेगा, तो सरकार अब क्यों पाबंदी लगा रही है. 

स्पष्ट है जो लाइन में लगे, जिन्होने भीड़ बढाई, जिन्होंने संयम नहीं बरता वो होशियार लोग बिना पेशी / पूछताछ के आराम से नोट ले गए और शेष बचे हुए सभी मोदी भक्तो को नोट लेने से पहले बेंक में सुनवाई के लिए लाइन में लगना होगा. यह न सिर्फ मोदी भक्तो के साथ विश्वासघात है बल्कि समानता के अधिकार पर बड़ा कुठाराघात है. मै तो मानता हूँ कि ऐसी वादा खिलाफी से पूरे देश की विश्वसनीयता पूरी तरह से खतरे में पड़ चुकी है.

अब भारत के नागरिको के सामने एक बड़ा यक्ष प्रश्न यह रह गया कि आखिर, भारत में विश्वास करे तो करे किसका और देश में विश्वसनीय है कौन – सीए. के. सी. मूंदड़ा ?

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