Friday, September 6, 2019

GST- दूकानदार को करना होंगे ये दो बदलाव  

GST- दूकानदार को करना होंगे ये दो बदलाव
● बदलना होगा दुकान के नाम का बोर्ड

 1 जुलाई से लागू होने वाली जीएसटी कानून में एक नया प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान के मुताबिक हर पंजीकृत करदाता को अपनी दुकान, कार्यालय, फैक्ट्री और ऑफिस में लगाये गए नाम के बोर्ड पर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर यानि की  जीएसटीआईएन नंबर लिखना भी जरुरी होगा। जिस – जिस जगह से करदाता व्यापार करता है उन सभी जगह पर फर्म और कंपनी के नाम के साथ जीएसटीआईएन नंबर भी लिखा जाएगा। इस नियम के लागू होने पर सभी दुकानों कार्यालयों के नाम के बोर्ड पर बदलाव देखने को मिलेगा। अभी किसी भी अप्रत्यक्ष कर कानून में बोर्ड पर रजिस्ट्रेशन नंबर लिखना प्रावधान नहीं है।

इसी तरह से जीएसटी कर कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि पंजीकृत करदाता अपना जीएसटी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट अपनी दुकान, कार्यालय या फैक्ट्री में डिसप्ले करके रखे। इन प्रावधानों से पंजीकृत और अपंजीकृत व्यापारियों की पहचान आसान हो जाएगी। कर अधिकारियों को भी कर वसूली में सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यापारियों को भी यह मालूम पड़ सकेगा कि वो माल पंजीकृत व्यापारी से खरीद रहे हैं या अपंजीकृत व्यापारी से क्योंकि पंजीकृत व्यापारी से माल खरीदने पर चुकाए गए कर की इनपुट टैक्स क्रेडिट तो मिल जाएगी लेकिन अपंजीकृत व्यापारी से माल खरीदने पर रिवर्स चार्ज में टैक्स जमा करना होगा।

● बदलना होगा बिल का प्रारूप

वर्तमान व्यवस्था में व्यापारी अभी जो बिल जारी करते हैं उसमें सामान्य तौर पर ये जानकारियां होती हैं :-

-बेचने वाले व्यापारी का नाम, पता और फोन नंबर
-व्यापारी का वैट नंबर
-खरीदने वाले का नाम
-बिल जारी करने की तारीख
-जो माल बेचा है उसकी संख्या/वजन, रेट और कुल कीमत

लेकिन जीएसटी लागू होने पर सभी व्यापारियों को उनके जारी किए जाने वाले बिल के प्रारूप में अब बदलाव करना होगा और इन पांच जानकारियों (व्यापारी का वैट नंबर को छोड़कर) के अलावा अतिरिक्त निम्न जानकारियां अपने बिल में आवश्यक तौर पर देना होगी,

बिल पर नया जीएसटीआईएन नंबर
-बिल नंबर या बिल क्रमांक
-खरीदने वाले का नाम, पता और उसका जीएसटीआईएन नंबर
-माल का एचएसएन (HSN) कोड
-कर की दर
अगर उसी राज्य में माल बेचा जा रहा हो तो सीजीएसटी और एसजीएसटी की कर की रकम और दूसरे राज्य में माल बेचा जा रहा हो तो आईजीएसटी कर की राशि
अगर माल डिलीवरी, खरीदने वाले के पते से अलग हो तो ऐसी जगह का पूर्ण पता
-अगर टैक्स रिवर्स चार्ज बेसिस पर देना हो तो उसकी जानकारी
-माल विक्रय में दिए जा रहे डिस्काउंट की रकम

ये सारी जानकारियां विक्रेता को अपने बिल में देना होगी।

◆क्यों जरूरी है बदलाव

बिल के प्रारूपों में बदलाव की आवश्यकता 2 प्रमुख वजहों से है। पहली वजह यह है कि जीएसटी डेस्टिनेशन आधारित कर है मतलब जिस राज्य में माल की खपत होगी टैक्स उसी राज्य का माना जाएगा। दूसरी वजह यह कि इनपुट टैक्स क्रेडिट, जीएसटी का मुख्य आधार है। इसलिए माल खरीदने वाले को चुकाए गए टैक्स की छूट आसानी से मिल सके इसलिए खरीदी बिल में समस्त जानकारियां होना जरूरी है। इन परिस्थितियों में यह आवश्यक होगा कि आप बिल के प्रारूप में बदलाव करें। आवश्यक जानकारियों का बिल में समावेश करें और नई बिल बुक बनवाएं। जो व्यापारी कंप्यूटर से बिल बनाते हैं वो भी प्रारूप में बदलाव करें। लेकिन जो व्यापारी कंपोजिशन स्कीम अपनाने वाले हों उन्हें अपने बिल के प्रारूप को बदलने की आवश्कता नहीं होगी क्यों उन्हें निश्चित रकम टैक्स के रूप में देना है।

  • सोहिल दम्मानी , इन्दोर.

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