Wednesday, December 18, 2019

Litigation Status in ‘Adarsh Modi Scam of 12000 Crores’ – ‘आदर्श मोदी घोटाले’ में कोर्ट केस की स्थितियां  

Litigation Status in Adarsh Modi Scam of 12000 Crores (‘आदर्श मोदी घोटाले’ में कोर्ट केस की स्थितियां) 

इस विषय का पूरा विडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करे.

  1. Adarsh मोदी ग्रुप की कुछ या सभी कंपनियों, परिजनों व मित्रो के खिलाफ SFIO (Serious Fraud Investigation Office जांच कर रहा है.

 2. SFIO, Delhi के आवेदन पर कंपनी ट्रिब्यूनल NCLT (National Company Law Tribunal) की चंडीगढ़, जयपुर, अहमदाबाद और चेन्नई बेंचो ने सभी संपतिया, बैंक खाते आदि सीज कर दिए.

 3. बाद में रोजमर्रा की जरूरत के लिए आंशिक छूट दी गयी और नियंत्रण के लिए अफसर की नियुक्ति भी की गयी.

 4. इस तरह से Adarsh मोदी ग्रुप अपने कंपनियों के लिए NCLT की 4 बेंचो में रिलीफ की उम्मीद कर रहा है लेकिन उम्मीद बहुत कम है.

 5. SFIO, Delhi ने गुडगाव के कोर्ट के एक लगभग 200 करोड़ के मामले में फोजदारी मुकदमा कर रखा जो कि जारी है.

 6. इस कोर्ट के आदेश के कारण ही मुकेश व राहुल मोदी 11 दिन कस्टडी में रहे और तीसरा सहयोगी एक महीने से भी ज्यादा कस्टडी में रहा.

 7. आश्चर्य जनक तरीके से मुकेश व राहुल मोदी हरियाणा में दायर उस केस में दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली और उसकी सुनवाई अभी भी दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही है.

 8. अंतरिम जमानत के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फेसले के विरूद्ध SFIO, SC में अपील लेकर गया जहा अंतिम सुनवाई हो चुकी है लेकिन फेसला कई दिनो से व्यस्त सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग चल रहा है.

 9. इन सभी मुकदमो में आदर्श क्रेडिट कोपरेटिव सोसाइटी किसी तरह से पक्षकार नहीं है और सोसाइटी की किसी भी प्रॉपर्टी का कोई भी मुकदमा किसी भी कोर्ट में नहीं चल रहा है.

10. सोसाइटी पर लिक्वीडेटर की नियुक्ति के बाद चार्ज ले लेने के बाद आदर्श मोदी ग्रुप गुजरात हाईकोर्ट में गया और यथा स्थिति का अस्थाई आदेश लेने में कामयाब हुआ. इस मामले की सुनवाई बहुत पहले पूरी हो चुकी है लेकिन हाईकोर्ट के पास समय नहीं होने के कारण एक महीने से भी ज्यादा समय से फाइनल आदेश लटका हुआ है. क्यों ?

11. एक मात्र यही मुकदमा है जिसमे सोसाइटी पार्टी है और आदर्श मोदी ग्रुप लिक्वीडेटर की नियुक्ति के खिलाफ रिट पेश की लेकिन देश का कोई क़ानून लिक्वीडेटर को नहीं हटा सकता. भले ही न्यायपालिका की धीमी गति के कारण देश के गरीब निवेशको को थोड़े दिन और बेवकूफ बनाया जाए.

 12. पिछले कुछ सप्ताहों में इस ग्रुप की कुछ बेनामी प्रॉपर्टीज बेनामी क़ानून के तहे सीज हुई है आयकर विभाग द्वारा.

 13. सरकारी स्तर पर जनता, देश वासियों और निवेशको को इन कोर्ट मामलों के बारे में कुछ भी नहीं बताया जा रहा है और सब कुछ छिपाया जा रहा है.

 

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